
सारिमुल लस्कर,शिलचर, 29 मई: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक बार फिर घोर हमला हुआ है। बाराक घाटी के लोकप्रिय समाचार पोर्टल ‘बराकबाणी’ के पत्रकार राजू दास पर उनके कार्यालय में बदमाशों द्वारा जानलेवा हमला किया गया है और वह फिलहाल मौत से जूझ रहे हैं।
यह घटना गुरुवार को दोपहर करीब 4 बजे शिलचर के सेकंड लिंक रोड, 11 नंबर लेन स्थित बराकबाणी कार्यालय में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राहुल दास के नेतृत्व में कुछ बदमाश अचानक कार्यालय में घुसे, मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और तेज धार वाले हथियारों तथा डंडों से राजू दास पर निर्मम हमला बोल दिया। पत्रकार के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वे खून से लथपथ होकर बेहोश हो गए। हमलावरों ने कार्यालय के कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, कैमरा आदि उपकरणों को भी तोड़-फोड़ दिया, जिससे लगभग चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हाल ही में बराकबाणी द्वारा प्रकाशित एक अन्वेषणात्मक खबर का बदला लेने के लिए यह हमला किया गया था। सूचना मिलते ही रांगिरखाड़ी पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची, स्थिति को नियंत्रित किया और मुख्य आरोपी राहुल दास को गिरफ्तार कर लिया। बाकी हमलावर अभी फरार हैं। बराकबाणी प्रबंधन ने पुलिस में विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई है और जांच जारी है।
प्राथमिक उपचार के बाद राजू दास को घर ले जाया गया था, लेकिन रात में उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत ग्रीन हिल्स प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां वह मौत से लड़ रहे हैं। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को बेहद नाजुक बताते हुए चिंता जताई है।
यह कोई अलग घटना नहीं है। असम समेत पूरे भारत में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। भूमि कब्जा, भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी, राजनीतिक स्वार्थ और प्रशासनिक अनियमितताओं को उजागर करने वाले पत्रकारों को बार-बार जान का खतरा उठाना पड़ रहा है। बाराक घाटी में भी पिछले वर्षों में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जो प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं।
इस बर्बर हमले की घटना पर स्थानीय पत्रकार संगठनों, संपादकों और नागरिक समाज में तीखी निंदा और आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, पत्रकारों की सुरक्षा और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
राजू दास जैसे पत्रकार जब सच्चाई सामने लाने के लिए अपनी जान पर खेलते हैं तो समूची लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता है। हम राजू दास के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। उनके परिवार के साथ खड़े होना और न्याय सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। जब तक पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक सच्ची प्रेस स्वतंत्रता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी।