• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Tuesday, March 24, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • Page 3 Family
    • E-Paper
    • E-Magazine
    • Management Team
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

ज़ेन ज़ेड (युवा पीढ़ी) में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति- क्या वे माता-पिता,पत्नी छोटे बच्चों, परिवार ईश्वर अल्लाह,समाज और राष्ट्र के दोषी नहीं हैं?- आधुनिक समाज की एक गंभीर और संवेदनशील चुनौती

by Dr. Parvinder Singh
March 15, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

हमारी रोजमर्रा की व्यवहारिक जिंदगी में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संवाद करते समय हमें शब्दों का चयन सोच समझ कर करना चाहिए

आओ ख़ुशहाल रिश्तों नातों को मज़बूत करने,नजरअंदाजी झुकना व समर्पण का भाव के मन्त्रों को आत्मसत करें

भारतीय रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर: शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज- पश्चिम एशिया संकट,वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और भारत की आर्थिक परीक्षा -समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

ज़ेड ज़ेन आत्महत्या करने के पहले सोचे कि क्या वे आत्महत्या करके पारिवारिक नैतिक और सामाजिक अपराधी तो नहीं बन रहे हैं? -एक पीड़ादायक सामाजिक यथार्थ

आत्महत्या करने के पहले ज़ेड ज़ेन सोचें माता-पिता,पत्नी छोटे बच्चों को कितना कष्टदायक अति दुखी छोड़ कर जा रहे हैं?क्या ईश्वर अल्लाह उन्हें क्षमा करेंगे? नरक यानें जहन्नुम में इसकी सजा भुगतांगे?तो वें आत्महत्या कर नहीं पाएंगे- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर 21वीं सदी को तकनीक, वैश्वीकरण और अभूतपूर्व अवसरों की सदी कहा जाता है।आज का युवा वर्ग,जिसे सामान्यतःज़ेन ज़ेड या नई पीढ़ी कहा जाता है,डिजिटल दुनियाँ के साथ पैदा हुआ है और उसी के साथ विकसित हुआ है।यह पीढ़ी तकनीकी रूप से सबसे अधिक सक्षम,सूचनाओं से भरपूर और वैश्विक अवसरों से जुड़ी हुई मानी जाती है।परंतु इस चमकदार आधुनिकता के पीछे एक बेहद चिंताजनक और दर्दनाक सच्चाई भी छिपी है, युवाओं में आत्महत्या के मामलों में लगातार वृद्धि।पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि युवा वर्ग के बीच आत्महत्या की घटनाएँ अचानक बढ़ती जा रही हैं। यह केवल किसी एक देश या समाज की समस्या नहीं है, बल्कि एक वैश्विक सामाजिक संकट बन चुकी है।भारत सहित अनेक देशों में यह चिंता का विषय है कि जीवन के सबसे ऊर्जावान और संभावनाओं से भरे चरण में ही युवा इतने निराश और असहाय क्यों महसूस कर रहे हैं कि वे अपने जीवन का अंत करने जैसा कदम उठा लेते हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि ज़ेन ज़ेड (युवा पीढ़ी) में आत्महत्या के मामलों में अचानक इतना इजाफा क्यों?ज़ेड ज़ेन आत्महत्या करने के पहले सोचे कि क्या वे आत्महत्या करके पारिवारिक नैतिक और सामाजिक अपराधी तो नहीं बन रहे हैं? अपने माता-पिता को कितना कष्टदायक अति दुखी छोड़ कर जा रहे हैं?अपनी पत्नी छोटे बच्चों को कितना भयंकर दुख देकर जा रहे हैं? क्या परलोक में ईश्वर अल्लाह उन्हें क्षमा करेंगे? परलोक जाकर वे नरक यानें जहन्नुम में इसकी सजा भुगतांगे ?इन सवालों के जवाब ढूंढने जाएंगे तो वें आत्महत्या कर नहीं पाएंगे इसीलिए ऐसा जनजागरण शासन प्रशासन व समाज द्वारा करना अत्यंत जरूरी है तथा आत्महत्या के कारणों को खोज उनका समाधान ढूंढने की कोशिश की जानी चाहिए कि बच्चे टूट क्यों रहे हैं?इस सवाल क़ा जवाब ढूंढने जाएंगे तो वें आत्महत्या कर नहीं पाएंगे इसीलिए ऐसा जनजागरण शासन प्रशासन व समाज द्वारा करना अत्यंत जरूरी है,जब कोई युवा आत्महत्या करता है तो केवल एक जीवन समाप्त नहीं होता, बल्कि उसके साथ एक पूरा परिवार,अनेक सपने और अनगिनत भावनाएँ भी टूट जाती हैं माता-पिता, भाई- बहन,पत्नी और छोटे बच्चों के जीवन पर इसका गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ता है। इसलिए आत्महत्या केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि एक सामाजिक और नैतिक प्रश्न भी बन जाता है।आज की युवा पीढ़ी पर जीवन के कई प्रकार के दबाव एक साथ काम कर रहे हैं।शिक्षा, करियर,आर्थिक स्थिरता, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत संबंधों की जटिलताएँ युवाओं को सटीक मानसिक रूप से अत्यधिक दबाव में डाल देती हैं।
साथियों बात कर हम जब कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, उसकी पारिवारिक धार्मिक स्थिति की करें तो,उसके माता -पिता को जीवनभर का दुख और अपराधबोध झेलना पड़ता है। जिन माता-पिता ने अपने बच्चे को प्रेम और त्याग से बड़ा किया,उनके लिए यह आघात असहनीय होता है।यदि वह व्यक्ति विवाहित है और उसके छोटे बच्चे हैं,तो उनके जीवन पर इसका प्रभाव और भी गंभीर होता है।बच्चे अपने पिता या माता के बिना भावनात्मक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करते हैं।इस दृष्टि से देखा जाए तो आत्महत्या केवल एक व्यक्ति का निर्णय नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करने वाला कार्य है।दुनियाँ की लगभग सभी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराएँ जीवन को ईश्वर का अमूल्य उपहार मानती हैं। हिंदू, इस्लाम, ईसाई और अन्य धर्मों में आत्महत्या को सामान्यतः अनुचित या पापपूर्ण माना गया है।धार्मिक दृष्टिकोण यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों,उन्हें धैर्य,साहस और विश्वास के साथ सामना करना चाहिए।यदि युवा यह सोचें कि उनके इस कदम से उनके परिवार को कितना दुख होगा और क्या ईश्वर इस निर्णय को स्वीकार करेगा, तो संभव है कि वे अपने निर्णय पर बिलकुल पुनर्विचार करें।
साथियों बात अगर हम स्कूल कॉलेज के छात्रों द्वारा परिवार की अपेक्षा से आत्महत्या के दृष्टिकोण से देखें तो, स्कूल और कॉलेजों में प्रतिस्पर्धा इतनी तीव्र हो गई है कि कई बार विद्यार्थी पढ़ाई को सीखने की प्रक्रिया के बजाय एक मानसिक युद्ध की तरह अनुभव करने लगते हैं।परीक्षा में अच्छे अंक लाने, प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने और सफल करियर बनाने का दबाव कई युवाओं के लिए असहनीय हो जाता है।इसके साथ ही परिवार की अपेक्षाएँ भी अक्सर युवाओं के लिए मानसिक बोझ बन जाती हैं। माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करते हुए उनसे बड़ी-बड़ी उम्मीदें रखते हैं, लेकिन कई बार यह उम्मीदें बच्चों के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर देती हैं।जब कोई युवा इन अपेक्षाओं को पूरा करने में असफल महसूस करता है, तो वह स्वयं को असफल, अयोग्य और समाज से अलग-थलग समझने लगता है। यही भावना धीरे-धीरे निराशा और अवसाद का रूप ले सकती है।
साथियों बात अगर हम सट्टा जुआ शेयर मार्केटिंग सोशल मीडिया और तुलना की मानसिकता के दृष्टिकोण से देखें तो सट्टा जुआ शेयर मार्केटिंग डिजिटल गेम के बढ़ते प्रचलन जिसमें लंबी हार से आर्थिक देवता बनती है डिजिटल युग में सोशल मीडिया युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग अपने जीवन की केवल सफल और चमकदार तस्वीरें साझा करते हैं।जब कोई युवा लगातार दूसरों की सफलता, सुंदरता, विलासिता और लोकप्रियता को देखता है,तो उसके मन में अनजाने में तुलना की भावना पैदा हो जाती है। उसे लगता है कि उसका जीवन दूसरों की तुलना में कम सफल या कम आकर्षक है।यह तुलना धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है और व्यक्ति अपने जीवन से असंतुष्ट होने लगता है। कई बार यह असंतोष गहरी मानसिक पीड़ा और अवसाद में बदल जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ने युवाओं के बीच परफेक्ट लाइफ का एक ऐसा भ्रम पैदा कर दिया है जो वास्तविकता से बहुत दूर है, लेकिन युवा उसे सचमानकर अपने जीवन से निराश होने लगते हैं।
साथियों बात कर हम भावनात्मक अकेलापन और संवाद की कमी के दृष्टिकोण से सोचने की करें तो आधुनिक जीवन में भौतिक सुविधाएँ बढ़ी हैं, लेकिन भावनात्मक संबंध कमजोर होते जा रहे हैं। परिवारों में संवाद कम होता जा रहा है और कई युवा अपने मन की बात किसी से साझा नहीं कर पाते।कई बार युवा अपने माता-पिता, मित्रों या जीवनसाथी से अपनी परेशानियों को बताने से हिचकिचाते हैं। उन्हें डर होता है कि लोग उन्हें कमजोर समझेंगे या उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लेंगे।यह भावनात्मक अकेलापन धीरे-धीरे भीतर ही भीतर उन्हें तोड़ने लगता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अपने दुख और तनाव को अकेले सहता है, तो उसकी मानसिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो सकती है। पारिवारिक और वैवाहिक संबंधों की जटिलताएँ आज के समाज में व्यक्तिगत संबंधों में भी कई प्रकार की जटिलताएँ दिखाई देती हैं। प्रेम संबंधों का टूटना, वैवाहिक विवाद, या पारिवारिक तनाव कई युवाओं को गहरे मानसिक संकट में डाल देते हैं।कई मामलों में यह देखा गया है कि विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद होने पर या जीवनसाथी के अलग हो जाने पर युवा मानसिक रूप से टूट जाते हैं। कुछ लोग इस स्थिति को जीवन की असफलता के रूप में देखने लगते हैं।
जब भावनात्मक समर्थन नहीं मिलता और व्यक्ति को लगता है कि उसका जीवन पूरी तरह बिखर गया है, तब वह निराशा के उस स्तर तक पहुँच सकता है जहाँ उसे आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता दिखाई देता है।
साथियों बात अगर हम नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से आत्महत्या के समाधान को देखने की करें तो आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत पीड़ा का परिणाम मानना पर्याप्त नहीं है। यह एक नैतिक और सामाजिक प्रश्न भी है।आत्महत्या की समस्या का समाधान केवल व्यक्तिगत स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए समाज, परिवार, शिक्षा प्रणाली और सरकार सभी को मिलकर काम करना होगा।स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि भावनात्मक संतुलन और जीवन कौशल सिखाने की भी आवश्यकता है।वैसे ही सरकार को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना चाहिएकाउंसलिंग सेंटर,हेल्पलाइन और मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र युवाओं के लिए उपलब्ध होने चाहिए ताकि संकट के समय वे सहायता प्राप्त कर सकें।परिवार की भूमिका:सुनना औरसमझना विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को डांटने या केवल सलाह देने से अधिक महत्वपूर्ण है उनकी बातों को ध्यान से सुनना। माता-पिता और परिवार के सदस्यों को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिसमें बच्चे बिना डर या झिझक के अपनी भावनाएँ व्यक्त कर सकें।यदि कोई युवा अपनी समस्या साझा करता है, तो उसे गंभीरता से सुनना और समझना अत्यंत आवश्यक है। कई बार केवल सहानुभूति और भावनात्मक समर्थन ही व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाल सकता है।
साथियों बात अगर हम जनजागरण और सामाजिक अभियान की आवश्यकता को समझने की करें तो आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाना आवश्यक है। समाज में यह संदेश फैलाना चाहिए कि जीवन कीकठिनाइयाँ अस्थायी होती हैं, लेकिन आत्महत्या का निर्णय स्थायी और अपरिवर्तनीय होता है।मीडिया, सामाजिक संस्थाएँ और धार्मिक संगठन मिलकर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर सकते हैं।यह भी आवश्यक है कि समाज में ऐसी संस्कृति विकसित की जाए जिसमें मानसिक समस्याओं को कमजोरी नहीं बल्कि सामान्य मानवीय अनुभव के रूप में समझा जाए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि जीवन का मूल्य और आशा का संदेशयुवा किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति और भविष्य होते हैं।उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता और सपने ही राष्ट्र के विकास की नींव बनाते हैं।यदि युवा निराशा और अवसाद के कारण अपना जीवन समाप्त करने लगें,तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। आत्महत्या की समस्या का समाधान केवल उपदेश देने से नहीं बल्कि संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग से संभव है। हमें युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि जीवन की हर कठिनाई का समाधान संभव है और कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके कारण जीवन समाप्त कर दिया जाए।जब परिवार, समाज और सरकार मिलकर युवाओं को सहारा देंगे,उनकी बात सुनेंगे और उन्हें आशा का मार्ग दिखाएंगे, तब ही हम इस गंभीर सामाजिक संकट को कम कर पाएंगे।जीवन अनमोल है, और हर युवा का जीवन केवल उसका नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर है। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी युवा अकेला, असहाय और निराश महसूस न करे।

kishan2
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Dr. Parvinder Singh

Dr. Parvinder Singh

Page3news Worldwide, founded by Dr. Parvinder Singh, is a pioneering multilingual newspaper based in Thailand. Our mission is to deliver news that resonates with truth and integrity, free from fear and pressure. We believe in the principles of simple living and high thinking, striving to connect with a global audience. Page3news is dedicated to providing diverse perspectives, ensuring that every voice is heard. Join us in our journey to redefine journalism for a better world. Dr. Parvinder Singh Founder - Page3News Worldwide & Dr. Monruedee Sommart Co-Founder & President - Page3news Worldwide Email : page3newsthai@gmail.com

Related Posts

हमारी रोजमर्रा की व्यवहारिक जिंदगी में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संवाद करते समय हमें शब्दों का चयन सोच समझ कर करना चाहिए

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

किसी भी विषय वस्तु पर अपनी राय बनाते,शब्दों का चयन करते समय विवेकपूर्ण हाजिर मंथन ज़रूरी सामाजिक राजनीतिक स्तरपर बयान...

आओ ख़ुशहाल रिश्तों नातों को मज़बूत करने,नजरअंदाजी झुकना व समर्पण का भाव के मन्त्रों को आत्मसत करें

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

आओ खुशियों के ख़ूबसूरत रिश्तों नातों संबंधों की क़द्र करें रिश्तों नातों को ख़ुशहाल बनाने आपसी आत्मविश्वास,समर्पण भाव, सहमति, समर्थन...

भारतीय रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर: शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज- पश्चिम एशिया संकट,वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और भारत की आर्थिक परीक्षा -समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
March 24, 2026
0
0

आर्थिक संकेतों के पीछे छिपी वैश्विक कहानी- आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य का नतीजा -समाधान आपसी समझ ज़रूरी पश्चिम एशिया...

सफ़ल होने की कौशलताएं भारतीयों में कूट-कूट कर भरी है बस अपने आपको पहचानने की जरूरत है-हर दिन एक नया इतिहास रच सकते हैं

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
13

अपनी बुद्धि का सकारात्मक उपयोग लेने पर अगर हम उतारू हो गए!तो हम सफलताओं का हर दिन एक नया इतिहास...

भ्रष्टाचार करने वाले ध्यान दें- भ्रष्टाचारी धन दुर्घटना,गंभीर बीमारी,नुकसान या अन्‍य कारण से निकल जाता है

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
5

ईमानदारी वफादारी सुखी जीवन का मंत्र भ्रष्टाचार, फरेब, अन्याय, धोखे सहित गलत स्त्रोतों से कमाया गया धन, बीमारी दुखों क्लेश...

परमाणु छाया में सुलगता पश्चिम एशिया- ईरान- इजरायल – अमेरिका टकराव, रेडिएशन का खतरा- कैंसर,जन्मजात विकृतियां, प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना और दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति -समग्र विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
March 23, 2026
0
4

परमाणु ठिकानों पर हमले- रणनीतिक दबाव या खतरनाक जुआ? -युद्ध का बदलता स्वरूप और बढ़ती आशंकाएँ परमाणु ठिकानों पर हमले,...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

March 2026
MTWTFSS
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031 
« Feb    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • E-Magazine
  • Management Team
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.