• About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
Monday, June 15, 2026
  • Login
  • Register
Page3News Worldwide
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
  • Home
  • E-Paper
  • Subscriptions
  • Countries
    • USA
    • Canada
    • India
    • Balochistan
    • Thailand
    • UK
    • Australia
  • Language Wise News
    • Thai News
    • Punjabi News
    • Hindi News
  • Other News
    • World News
    • Latest Movie Reviews
    • Culture
    • Finance
    • Hollywood
    • Business
    • Entertainment
    • Sports
    • Lifestyle
    • Fashion
    • food
    • Health
    • Travel
    • Politics
    • Science
    • Tech
  • Multilingual Editorial
    • English Editorials
    • Thai Editorials
    • Hindi Editorials
    • Punjabi Editorials
    • Page3News Special
No Result
View All Result
Page3News Worldwide
No Result
View All Result
Home Hindi Editorials

डिजिटल प्रदूषण-बचपन पर मंडराता संकट- सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाम की तैयारी- गाजियाबाद सुसाइड बड़ा ट्रिगर पॉइंट-एक समग्र वैश्विक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
February 8, 2026
in Hindi Editorials
0
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on WhatsappShare on TelegramShare on LineShare on Email

RelatedPosts

सुशासन का अनिवार्य मानक- सरकार आपके द्वार मॉडल: नागरिक केन्द्रित सेवा वितरण, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक दक्षता का नया प्रतिमान

अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भारतीय शेयर बाजार: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था की परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण

फास्ट फूड संस्कृति बनाम भारतीय आहार परंपरा:युवाओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता संकट

डिजिटल युग में बचपन,समाज संस्कृति पर मंडराता संकट- सोशल मीडिया ऑनलाइन गेमिंग और सामाजिक जिम्मेदारी का वैश्विक विमर्श

संभवतःसोशल मीडिया का बच्चों के लिए बैन- गाजियाबाद में सोशल मीडिया लत व ऑनलाइन गेमिंग के कारण तीन सगी बहनों की आत्महत्या को चर्चा का ट्रिगर पॉइंट माना जा रहा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मानव सभ्यता ने हजारों वर्षों में जिन मूल्यों, सामाजिक रिश्तों और विश्वास की संरचनाओं को गढ़ा है, वे आज डिजिटल तकनीक की अभूतपूर्व गति से चुनौती का सामना कर रहे हैं।सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग ने संवाद,मनोरंजन और सूचना के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। यह परिवर्तन अपने आप में न तो पूरी तरह नकारात्मक है और न ही पूर्णतः सकारात्मक,लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब समाज, विशेषकर बच्चे इस परिवर्तन के मनोवैज्ञानिक, नैतिक और सामाजिक प्रभावों के लिए तैयार नहीं होते। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि भारत जैसे देश में,जहां आध्यात्मिक परंपरा,पारिवारिक मूल्य और सामाजिक सहभागिता जीवन की आत्मा रहे हैं,वहां डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनियंत्रित प्रभाव एक गंभीर चेतावनी के रूप में उभर रहा है।सामाजिक सद्भाव,विश्वास और सोशल मीडिया की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है,भारतीय समाज की विशेषता उसका सामाजिक ताना-बाना है,जो केवल कानून या संस्थाओं से नहींबल्कि आपसी विश्वास,परंपराओं और सामूहिक चेतना से बना है। सोशल मीडिया ने इस ताने-बाने को एक ओर जोड़ने का माध्यम दिया है,वहीं दूसरी ओर गलत सूचना, घृणा, तुलना और आभासी प्रतिस्पर्धा के जरिए इसे कमजोर भी किया है।नवीनतम आर्थिक सर्वे द्वारा सोशल मीडिया के सामाजिक प्रभावों पर चिंता जताना इस बात का संकेत है कि अब यह विषय केवल नैतिक बहस का नहीं, बल्कि नीति और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि हर समाधान केवल सरकारी नीतियों से नहीं आ सकता। समाज, शैक्षणिक संस्थान, सिविल सोसायटी और सबसे बढ़कर माता-पिता की भूमिका यहां निर्णायक बन जाती है। सरकार नियंत्रण और दिशा दे सकती है, लेकिन बच्चों के दैनिक जीवन में डिजिटल संतुलन लाने की जिम्मेदारी सामूहिक प्रयास से ही निभाई जा सकती है।
साथियों बात अगर हम गाजियाबाद घटना के बाद भारत में सोशल मीडिया का बच्चों के लिए बैन पर विचार करने की करें तो, मीडिया में उपलब्ध जानकारी के अनुसार आर्थिक सर्वे में बच्चों पर डिजिटल प्रदूषण पर चिंता जताए जाने के बाद से यह मुद्दा विचारणीय था लेकिन गाजियाबाद में सोशल मीडिया लत व ऑनलाइन गेमिंग के कारण तीन सगी बहनों की आत्महत्या को देश के नीति निर्माताओं की चर्चा का ट्रिगर पॉइंट माना जा रहा है।आर्थिक सर्वेक्षण-26 में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और युवाओं की मानसिक सेहत पर उसके असर को लेकर चिंता जताते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में ठोस नीति बनाने का सुझाव दिया गया था। केंद्रीय सूचना प्रौद्याेगिकी (आइटी) सचिव ने कहा है कि सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय करने का मुद्दा सरकार की समीक्षा के दायरे में है। बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव को देखते हुए सरकार विभिन्न हितधारकों से परामर्श कर रही है और उचित समय पर इस बारे में निर्णय किया जाएगा। साथियों बात अगर हम ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया:मनोरंजन से मानसिक दबाव तक की यात्रा को समझने की करें तो,आज का बच्चा एक ऐसे डिजिटल परिवेश में बड़ा हो रहा है जहां स्क्रीन उसकी पहली खिड़की बन चुकी है।ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया अब केवल समय बिताने का साधन नहीं रहे, बल्कि वे बच्चों की सोच,भावनाओं और आत्म-छवि को आकार देने लगे हैं। टास्क- आधारित गेम्स बच्चों को लगातार नए लक्ष्य देते हैं,लेवल पूरा करो,चुनौती स्वीकार करो,आगे बढ़ो और यह प्रक्रिया धीरे-धीरे दबाव में बदल जाती है। कई बार इन चुनौतियों की प्रकृति भावनात्मक रूप से असुरक्षित होती है,जहां हार का डर, असफलता की शर्म और आभासी दुनिया की स्वीकृति वास्तविक जीवन से अधिक महत्वपूर्ण लगने लगती है।विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चा आभासी दुनिया को वास्तविक जीवन के समकक्ष या उससे अधिक वास्तविक समझने लगता है, तब मानसिक जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। आत्म-सम्मान, धैर्य और भावनात्मक संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ता है।
साथियों बात अगर हम ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण:वैश्विक बहस की शुरुआत को समझने की करें तो,इसी खतरे को गंभीरता से समझते हुए ऑस्ट्रेलिया ने दो माह पहले एक ऐतिहासिक कदम उठाया।16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, एक्स,फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और थ्रेड्स जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया गया। न केवल नए खाते बनाने पर रोक लगी, बल्कि मौजूदा प्रोफाइल भी निष्क्रिय कर दी गईं। यह कदम अपनी तरह का पहला था और उसने पूरी दुनिया में एक नई बहस को जन्म दिया,क्या बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल स्वतंत्रता को सीमित करना जरूरी हो गया है?यह निर्णय केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। अन्य देश इस मॉडल को बारीकी से देख रहे हैं और अपने-अपने सामाजिक संदर्भ में इसके निहितार्थों का आकलन कर रहे हैं।
साथियों बात अगर हम भारत में बढ़ती डिजिटल लत और सुरक्षा चिंताओं को समझने की करें तो, भारत में भी हाल के वर्षों में बच्चों में डिजिटल एडिक्शन के मामले तेजी से बढ़े हैं।गाजियाबाद और भोपाल जैसी घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है,जहां ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की लत ने मासूम जिंदगियों पर गंभीर असर डाला। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट आने वाली पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करेगा। हालांकि केंद्रीय आईटी मंत्रालय की ओर से अभी कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है, लेकिन 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या सख्त नियम बनाने पर गंभीर मंथन चल रहा है। यह बहस केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य, समाज की स्थिरता और राष्ट्रीय मानव पूंजी से जुड़ा प्रश्न है।
साथियों बात अगर हम क्या ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है? इसको समझने की करें तो,लगातार स्क्रीन टाइम बच्चों में अकेलापन, चिड़चिड़ापन तनाव और अवसाद को बढ़ा सकता है। कई अध्ययन बताते हैं कि डिजिटल एडिक्शन बच्चों के व्यवहार और भावनात्मक संतुलन को कमजोर करता है। जब गेमिंग टास्क बच्चों पर लगातार दबाव डालते हैं,जीतने की मजबूरी,हार का डर और सामाजिक तुलना,तो वे मानसिक रूप से टूट सकते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे आत्म-विश्वास की कमी और सामाजिक अलगाव में बदल जाती है।
साथियों बात अगर हम सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी: मुनाफा बनाम नैतिकता को समझने की करें तो, सोशल मीडिया और गेमिंग कंपनियां एल्गोरिदम के जरिए उपयोगकर्ताओं को अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने का प्रयास करती हैं। इससे उनका आर्थिक लाभ बढ़ता है, लेकिन बच्चों के संदर्भ में यह रणनीति खतरनाक साबित हो सकती है। आयु सत्यापन, कंटेंट फिल्टर और बच्चों के लिए अलग सुरक्षा ढांचे की कमी इस समस्या को और गहरा करती है। विशेषज्ञों का मत है कि कंपनियों को केवल मुनाफे के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपने व्यापार मॉडल का हिस्सा बनाना चाहिए।
साथियों बात अगर हम माता- पिता की भूमिका: पहली और सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार तथा बैन या नियमन: इसको समझने की करें तो समाधान की जटिलता,पूर्ण प्रतिबंध एक सरल उत्तर प्रतीत हो सकता है, लेकिन व्यवहार में यह जटिल है। तकनीक को पूरी तरह रोकना न तो संभव है और न ही व्यावहारिक। हालांकि, सख्त नियम, समय सीमा, आयु- आधारित एक्सेस और कंटेंट मॉडरेशन जैसे उपाय प्रभावी हो सकते हैं। कई देशों ने बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष नियम बनाए हैं। भारत में भी अब इस दिशा में मांग तेज हो रही है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। माता-पिता बच्चों को इस खतरे से बचाने में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखना, स्क्रीन टाइम सीमित करना और सबसे महत्वपूर्ण खुलकर संवाद करना,आज की आवश्यकता है।भावनात्मक समर्थन और भरोसे का वातावरण बच्चों को आभासी दबाव से बाहर निकाल सकता है। डिजिटल उपकरणों को पूरी तरह बच्चों के भरोसे छोड़ देना जोखिम भरा हो सकता है। स्कूल और समाज:सामूहिक समाधान की दिशा में, स्कूलों में डिजिटल एडिक्शन पर काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। बच्चों को खेल, कला, संगीत और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना डिजिटल संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। समाज को भी यह समझना होगा कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि संतुलन ही समाधान है,डिजिटल युग को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन उसे विवेक और संवेदन शीलता के साथ अपनाया जा सकता है।बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देना सरकार, उद्योग परिवार और समाज, सभी की साझा जिम्मेदारी है। सवाल यह नहीं है कि तकनीक रहे या न रहे, बल्कि यह है कि तकनीक किसके नियंत्रण में और किस उद्देश्य से रहे। यदि आज संतुलित और साहसी निर्णय नहीं लिए गए, तो कल इसकी कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ सकती है।

kishan2 1
संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

Get real time update about this post categories directly on your device, subscribe now.

Unsubscribe
Page 3 News International Desk

Page 3 News International Desk

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print. The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Related Posts

सुशासन का अनिवार्य मानक- सरकार आपके द्वार मॉडल: नागरिक केन्द्रित सेवा वितरण, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक दक्षता का नया प्रतिमान

by Page 3 News International Desk
June 15, 2026
0
0

देश क़ीसभी राज्य सरकारों को पंजाब और दिल्ली क़ा सरकार तुहाडे द्वार व डोरस्टेप डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज यह मॉडल...

अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भारतीय शेयर बाजार: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था की परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण

by Page 3 News International Desk
June 15, 2026
0
0

अमेरिका ईरान तनाव-संभावित समझौते को लेकर परस्पर विरोधी दावों ने विश्व निवेशकों को असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया...

फास्ट फूड संस्कृति बनाम भारतीय आहार परंपरा:युवाओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता संकट

by Page 3 News International Desk
June 14, 2026
0
0

स्वस्थ भारत के निर्माण का मूल मंत्र:टिकाऊ जीवन शैली की ओर लौटें युवाओं में बढ़ते फास्ट फूड के प्रचलन से...

गृहिणियाँ @ गृहिणी नहीं,राष्ट्र निर्माता,नेशन बिल्डर: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- अवैतनिक घरेलू श्रम को मिली कानूनी मान्यता

by Page 3 News International Desk
June 14, 2026
0
3

भारतीय न्यायिक इतिहास में महिलाओं के अवैतनिक घरेलू श्रम को कानूनी, आर्थिक और सामाजिक मान्यता देने वाला एक मील का...

दयालु, सुविचार,नम्रता से संस्कृति मानव के हृदय में द्वेष, अभिमान अहम,अहंकार जैसे अनेक विकारों को भी आने से डर लगतासादगी से व्यक्ति के कार्यों में

by Page 3 News International Desk
June 13, 2026
0
3

गुणवत्ता,चेतना आती है तो दृष्टिकोण में स्पष्टता,इच्छाओं का सही प्रबंधन कर संतुष्टि से खुशियों के द्वार खुलते हैं सादा जीवन...

दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबंधित सेवाएं) नियम, 2026 ड्राफ्ट : 27 जुलाई 2026 तक सुझाव आमंत्रित- भारत के प्रसारण क्षेत्र में डिजिटल युग के अनुरूप नियामक क्रांति की ओर एक बड़ा कदम

by Page 3 News International Desk
June 13, 2026
0
8

नया मसौदा दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबंधित सेवाएं) नियम, 2026 एक ऐसे नियामक मॉडल की ओर बढ़ता है जो तकनीकी...

Facebook Twitter Youtube Instagram Tumblr Pinterest

Page 3 News Multilingual Worldwide

The Page 3 News is a Multilingual Worldwide daily newspaper founded in 2021. It is published in Bangkok, Thailand by the Page 3 News Thai Limited Partnership. Page 3 News is available to the world in all the three formats i.e. e-Paper, digital and print.

The Page 3 News is having offices in many countries like Thailand, India, Canada, USA, etc. and is currently published in English, Thai, Hindi and Punjabi languages.

Category

Calanderwise News

June 2026
MTWTFSS
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930 
« May    

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

*By registering into our website, you agree to the Terms & Conditions and Privacy Policy.
All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Subscriptions
  • E-Paper
  • World News
  • Balochistan
  • USA
  • India
  • Thailand
  • Canada
  • UK
  • Australia
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

© 2024 Page 3 News - First Multilingual Worldwide Newspaper based in Thailand.

This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy.