महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या। 76 वर्ष पहले 22 दिसंबर 1949 की आधी रात अयोध्या के विवादित राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद परिसर में भगवान रामलला प्रकट हुए थे। यह घटना राम मंदिर आंदोलन से लेकर भव्य मंदिर के निर्माण तक की यात्रा का सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुई। राम जन्मभूमि सेवा समिति की ओर से इस दिन लगातार रामलला का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। इस बार 77वां प्राकट्योत्सव 23 दिसंबर को मनाया जाएगा। वर्ष 1949 में 22 दिसंबर की रात विवादित परिसर में रामलला प्रकट हुए थे। उस दिन यहां पर हवलदार अब्दुल बरकत की ड्यूटी थी। उन्हें रात 12:00 बजे पहुंचना था लेकिन वह 1:30 बजे पहुंचे। ड्यूटी में लापरवाही के आरोप पर जब उन्होंने जवाब दाखिल किया तो बरकत ने रामलला के प्रकट होने का समर्थन किया। हवलदार की ओर से दर्ज एफआईआर में भी यही बताया गया कि आधी रात के बाद अलौकिक रोशनी हुई। जब रोशनी कम हुई तो उन्होंने जो देखा उसे पर भरोसा नहीं हुआ, विवादित परिसर में रामलला विराजमान थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने विवादित परिसर से अगले दिन मूर्ति हटाने का निर्देश दिया। तत्कालीन डीएम केके नैयर के अवकाश पर रहने के चलते कार्यभार देख रहे नगर मजिस्ट्रेट ठाकुर गुरुदत्त सिंह ने दंगा भड़कने का हवाला देते हुए ऐसा करने से इन्कार कर दिया। बाद में उन्होंने त्यागपत्र भी दे दिया। इसके आदेश जारी किया कि विवादित परिसर क्षेत्र को कुर्क किया जाता है और यहां पर धारा 144 लागू की जाती है। एक अन्य आदेश में उन्होंने रामललला की मूर्ति के भोग प्रसाद और प्रतिदिन पूजन करने का आदेश हिंदुओं के पक्ष में कर दिया। तब से रामलला पहले विवादित परिसर में और फिर इसके विध्वंस के बाद टेंट में विराजमान रहे। अब वही रामलला भव्य मंदिर में विराजे हुए हैं।
