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नई दिल्ली, 20दिसम्बर।
दिल्ली में वायु प्रदूषण के गंभीर हालात के बीच प्रशासन ने वाहनों पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया है। राजधानी की सीमाओं पर नए प्रतिबंध प्रभावी हो गए हैं, जिनके तहत गैर-बीएस6 वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को या तो भारी जुर्माना भरना पड़ रहा है या फिर उन्हें वहीं से वापस लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस कार्रवाई का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को राजधानी से बाहर रखना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
नए निर्देशों को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें राजधानी के प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात कर दी गई हैं। कालिंदी कुंज, चिल्ला बॉर्डर, गाजीपुर और डीएनडी फ्लाईवे जैसे प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की गहन जांच की जा रही है। यहां वाहन के रजिस्ट्रेशन, उत्सर्जन मानक और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसीसी की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान खासतौर पर उन वाहनों को रोका जा रहा है, जो दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं और बीएस6 मानकों पर खरे नहीं उतरते। ऐसे वाहनों के मालिकों को स्पष्ट विकल्प दिया जा रहा है, या तो 20,000 रुपये का चालान भरें या फिर वहीं से यू-टर्न लेकर वापस लौट जाएं। अधिकारियों का कहना है कि नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। इस सख्ती का दायरा सिर्फ गैर-बीएस6 वाहनों तक सीमित नहीं है। 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन भी जांच के दायरे में हैं, खासकर वे वाहन जो बीएस-3 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों पर चलते हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया स्पष्टीकरण के बाद उठाया गया है, जिसमें अगस्त 12 के पुराने आदेश में संशोधन कर ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ किया गया है। इस बदलाव का असर पड़ोसी शहरों से दिल्ली आने वाले बड़ी संख्या में वाहनों पर पड़ा है। अनुमान है कि गुरुग्राम में करीब दो लाख, नोएडा में चार लाख और गाजियाबाद में लगभग साढ़े पांच लाख वाहन ऐसे हैं, जो नए मानकों के तहत प्रभावित हो सकते हैं। बॉर्डर चेकिंग के अलावा दिल्ली के भीतर भी निगरानी तेज कर दी गई है। राजधानी के पेट्रोल पंपों पर अब उन वाहनों को ईंधन नहीं दिया जा रहा है, जिनके पास वैध पीयूसीसी नहीं है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शहर के भीतर चलने वाले वाहन भी प्रदूषण मानकों का पालन करें।