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नई दिल्ली, 19 दिसम्बर।
दिल्ली सरकार द्वारा लगाई गई तमाम पाबंदियों के बावजूद राजधानी एक बार फिर वायु प्रदूषण के चपेट में है। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में एक्यूआई 450 के करीब पहुंच गया है। प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार क्या काम कर रही है। इसको लेकर दिल्ली जब दिल्ली के गृहमंत्री आशीष सूद से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, हमारी सरकार राजधानी को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में हमारी सरकार पिछले 10 महीनों से काम कर रही है। दिल्ली के गृहमंत्री आशीष सूद ने कहा, बच्चों के क्लासरूम में हम 10 हजार एयर प्यूरीफायर लगाने जा रहे हैं। जिसका टेंडर जारी कर दिया गया है। साथ ही हर विधानसभा में एक मैकैनिकल स्वीपर लगाया जाएगा, जिससे धूल उड़नी कम हो। ऐसे अनेक क्रांतिकारी काम काम सभी विभाग हुए है। ये सभी लंबी अवधि की योजनाएं हैं। इसमें समय लगेगा। आशीष सूद ने कहा, ‘मैं दिल्ली के लोगों, दिल्ली के युवाओं को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार पीआर एक्टिविटीज के बजाय दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए लंबी अवधि के प्रशासनिक सुधार कर रही है। जो लोग आलोचना करते हैं, अगर वे अपनी उपलब्धियों के बारे में भी बताएं तो बेहतर होगा।’ विपक्ष द्वारा प्रदूषण के मुद्दे पर सवाल उठाए जाने पर आशीष सूद ने कहा, प्रदूषण मौसमी समस्या नहीं है या पिछले 10 महीनें में उपजा विषय नहीं है। दिल्ली का अपना कोई मौसम नहीं होता। दिल्ली के प्रदूषण में आस-पास के राज्यों का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। हमारा अपना कोई मौसम नहीं है। इसके बावजूद भी कुछ बेरोजगार नेता पिछले कुछ दिनों से शोर मचा रहे हैं। शोर मच रहा है कि दिल्ली की सरकार ने एक्यूआई मॉनीटरों को केवल ग्रीन बेल्ट में स्थापित किया। 2016 से लेकर 18 तक 20 एक्यूआई स्टेशन लगाए गए। 20 एक्यूआई स्टेशन में 30% ग्रीन बेल्ट में लगाए गए क्योंकि पिछली सरकार को हवा साफ नहीं करनी थी बल्कि आंकड़े साफ करने थे। यह कैग की रिपोर्ट है।”
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लेते हुए आशीष सूद ने कहा, अरविंद केजरिवाल वैज्ञानिक उदाहरण लेकर आए थे कि इस सरकार ने ‘ऑड-ईवन’ शुरू नहीं किया लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ‘ऑड-ईवन’ पर एनजीटी ने सरकार को फटकारा था। एनजीटी ने कहा था कि आपके पास 100 सुझाव हैं लेकिन आप उन्हें लागू नहीं कर रहे हैं। उसके बाद वे इससे भी बड़ा ‘क्रांतिकारी’ कदम लाए थे, ‘रेड लाइट ऑन इंजन ऑफ’ के प्रभाव से जुड़ा कोई आंकड़ा सामने नहीं आया था। गृहमंत्री ने कहा, दिल्ली का प्रदूषण इनके लिए एक एक्टिविटी रहा था और है। हम अपने बच्चों की सांसों पर राजनीति नहीं करना चाहते। अगर इनके मन में सुधार की चेष्टा थी तो उन्हें दिल्ली के पर्यवहन को ठीक करना चाहिए था, कूड़े की समस्या को ठीक करना चाहिए था। दिल्ली के सफाई कर्मचारियों को ये सरकार पैसा नहीं देती थी।
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