
महेंद्र त्रिपाठी
अयोध्या
डॉक्टर मुरलीधर सिंह शास्त्री मा उच्च न्यायालय अधिवक्ता
पूर्व उपनिदेशक मुख्यमंत्री मीडिया सेंटर लोक भवन
17 दिसंबर 2025 सूचना आयोग के सूचना आयुक्त को भी के विषय में भी शिकायत करने का धारा 17 में एवं 20 में प्रावधान है डॉ मुरलीधर सिंह ने बताया कि
सोशल मीडिया के युग में सूचना देने में उदारता रखनी चाहिए
भारतीय संविधान में मूल अधिकार के बाद मानवाधिकार अधिनियम एवं तीसरे नंबर पर
सूचना अधिकार अधिनियम
जनता का लगभग मूल अधिकार के बराबर अधिकार है
आम लोगों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है तथा निजी तौर पर भी इसको प्रशिक्षण दिया जाएगा
सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के ,लागू हुए देश में 10 साल से ज्यादा हो गए हैं
इस अधिनियम की घोषणा अधिनियम की नोटिफिकेशन 22 जून 2005 को हुई थी तथा इसके संबंध में लागू करने हेतु भारत सरकार द कैबिनेट सेक्रेटरी के माध्यम से 22 जुलाई 2005 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए
लागू करने का निर्देश दिया गया था इस अधिनियम या के संबंध में मुख्य बातें थी
की अनेक राष्ट्रों ने अपने सरकारी काम कार्यों की पारदर्शिता के लिए काम किया है इस पारदर्शिता के उद्देश्य से यह जनता का अधिनियम जो लोकतंत्र में मूल अधिकारों के बाद मानवाधिकार अधिनियम और उसके बाद सबसे बड़ा प्रभावशाली अधिनियम सूचना का अधिकार अधिनियम है
(इसके लागू होने से विश्व के जनसंख्या के छठवें भाग के एक व्यक्ति को यह अधिकार मिल गया,,,,,) इस अधिकार की मुख्य विशेषता थी कार्यालय में सरकारी कामों में पारदर्शिता हो ट्रांसपेरेंसी हो एवं अकाउंटेबिलिटी हो जवाबदेही हो और सभी कामों को समय से पूरा किया जाए और
साधन की कमी हो तो सरकार से उसे क्षेत्र के लिए साधन की मांग किया जाए
इसके 10 साल लागू होने के बाद सामान्य न्यायालय में लगभग ढाई करोड़ तथा
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत पूरे देश में लगभग 3 लाख से मामले ज्यादा लंबित हैं
जिसमें भारत सरकार के पास 55000 और उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के पास लगभग 5000 मामले लंबित हैं
सूचना आयोग में कुल कल 31 धाराएं हैं इसमें से विशेष रूप से मैं 18/ 19/ एवं 20 पर चर्चा करूंगा जहां 18 अधिनियम इनको अधिनियम की धारा इनको सिविल कोर्ट्स का अधिकार प्रदान करती है वहीं
धारा 19 इन अपील का अधिकार प्रदान करते हैं तथा
धारा 20 संबंधित जन सूचना अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने एवं अधिकतम 25000 दंड करने की करते हैं
साथ में (सबसे बड़ा इंपॉर्टेंट धारा आया है धारा 17 है ,,,,ज़)जो सूचना आयुक्त के आचरण के संबंध में उनके कार्यों के संबंध में शिकायत करने की अनुमति देता है
यदि भारत सरकार का सूचना आयोग हो तो महामहिम राष्ट्रपति को और राज्य सरकार का सूचना आयोग हो तो महामहिम राज्यपाल को इसकी शिकायत की जा सकती है
की एक्ट बनाने वालों के पीछे या सांप मनसा थी आम जनता को सूचना मिले और वह 1 से और 2 से 3 पेशी पर या तारीख पर उसकी सूचनाओं मिल जाए
पर देखने में आता है की सूचना आयुक्त तारीख पर तारीख लगाए जाते हैं
तथा आम जनता को सूचना नहीं मिलती है इसके पीछे दो कारण हैं एक तो जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना न दिए जाने का बहाना बनाना
दूसरा यह है कि उसे विभाग के विभाग अध्यक्ष या कार्यालय अध्यक्ष द्वारा संबंधित जन सूचना अधिकारी को सूचना न देने का आदेश देना
इससे सूचना अधिकार के मनसा हल नहीं होती
राज्य सरकार ने जनमानस के सुविधा के लिए 2015 में व्यापक नियम नियमावली बनाई पर उसे नियमावली के अनुसार भी शासकीय विभाग में कार्रवाई नहीं होती जहां तक उत्तर प्रदेश सरकार की चर्चा है लगभग 12000 से ज्यादा जन सूचना अधिकारी हैं और वह अपने कार्यों को मुश्किल से 30 परसेंट ही पूरा कर पा रहे हैं
इसके लिए समय-समय पर समीक्षा की आवश्यकता है
और आम जनमानस को इसका सही उपयोग करना चाहिए
अनावश्यक रूप से ब्लैकमेलिंग के लिए काम नहीं किया जाना चाहिए
और इसको सरकारी सिस्टम को दबाव में लेने के लिए भी काम नहीं करना चाहिए और
तथा विभाग को भी यदि सूचना है तो तत्काल सूचना देना चाहिए यदि नहीं है तो स्पष्ट इनकार कर देना चाहिए अनावश्यक रूप से गुमराह नहीं करना चाहिए
सोशल मीडिया का जमाना है
आम जनता को सूचनाओं मिल जाती हैं
पर एक प्रामाणिक सूचना के लिए विभागों का और सूचना आयोग का चक्कर लगाता है
इसमें उदारता पूर्वक काम करना चाहिए और मेरी सरकार से मांग है कि इसकी समय-समय पर नोडल विभाग द्वारा इसकी समीक्षा भी की जानी चाहिए
तथा सूचना आयुक्त जो विधि स्नातक को कानून के जानकार हो ऐसे लोगों को ही बनाना जाना चाहिए