
नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के यूरोलॉजी विभाग ने किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं में एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। विभाग ने अपने पहले वर्ष में 21 सफल किडनी प्रत्यारोपण किए हैं, जिससे किडनी प्रत्यारोपण की कुल संख्या में 40% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि के साथ ही एआईआईएमएस का यूरोलॉजी विभाग अब किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर विभाग ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें विभाग की टीम की मेहनत और उनके कार्य में वृद्धि को सराहा गया। कार्यक्रम में डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार की सराहना की और यह बताया कि इस पहल से अधिक मरीजों को जीवन रक्षक उपचार मिल सकेगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. अमिलेश सेठ ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि हम अपने पहले वर्ष में इतनी बड़ी सफलता हासिल करने में सफल रहे हैं। इस कार्यक्रम की सफलता से किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में कमी आएगी और अधिक मरीजों को त्वरित उपचार मिल सकेगा।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारी बढ़ी हुई क्षमता उन मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो प्रत्यारोपण के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा सूची में थे।”
कार्यक्रम में उपस्थित नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. राकेश यादव ने भी किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “यह पहल मरीजों के लिए परिवर्तनकारी साबित हुई है। प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ने से अधिक परिवारों को नई उम्मीद मिली है और उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार आया है।”
वर्तमान में यूरोलॉजी विभाग में 44 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें से पांच बेड विशेष रूप से ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए आरक्षित हैं। विभाग में नौ फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं, और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए अतिरिक्त भर्ती की योजना बनाई जा रही है। विभाग हर सप्ताह लगभग 30 सर्जरी करता है, जिसमें चार ऑपरेशन थिएटर चलाए जाते हैं।
एआईआईएमएस के इस किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम की सफलता ने न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, बल्कि भारत में प्रत्यारोपण व्यवस्था को भी मजबूत किया है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को जीवन रक्षक उपचार मिल सकेगा।