
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिए भारत की आत्मा से सजे छह अनमोल तोहफे
आर पी तोमर
नई दिल्ली, 6 दिसंबर।
भारत के अलग-अलग राज्यों के स्वाद से सजा यह भोज कश्मीरी अखरोट की चटनी, अचारी बैंगन, पीली दाल तड़का, बंगाल की गुर सेंधेश और दक्षिण भारत का मुरक्कू जैसे व्यंजनों से खास बना। केसर पुलाव, लच्छा पराठा, मग़ नान और बादाम का हलवा ने ठंड में गर्माहट भी दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के खास पकवान शामिल थे। इस भोज में भारत की विविध परंपराओं को सामने रखा गया। मेहमानों को गुच्ची दून चेटीन (कश्मीरी अखरोट की चटनी के साथ भरी मशरूम), अचारी बैंगन और पीली दाल तड़का जैसे स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए।
मिठाइयों में बंगाल की गुर सेंधेश और दक्षिण भारत का लोकप्रिय नाश्ता मुरक्कू भी शामिल था। मुख्य व्यंजनों के साथ सूखे मेवे और केसर के पुलाव, लच्छा पराठा और मग़ज़ नान परोसे गए। ठंड को ध्यान में रखते हुए भोज का समापन बादाम का हलवा जैसे गर्म और स्वादिष्ट व्यंजनों से हुआ। इतना ही नहीं खास बात रही कि भोज के दौरान नेवल बैंड और क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल एनसेंबल ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ बॉलीवुड और रूसी धुनों की प्रस्तुति दी। बैंड ने शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी का गीत बजाया, वहीं रूसी लोकगीत कालिंका और राग अमृतवर्षिणी व नलिनकंठी की धुनें भी प्रस्तुत की गईं।
क्लासिकल एनसेंबल ने सरोद, सरंगी और तबला जैसे पारंपरिक वाद्यों पर कला का प्रदर्शन किया और रूसी संगीतकार प्योटर इलिच त्चाइकॉव्स्की को श्रद्धांजलि देते हुए द नटक्रैकर सुइट भी पेश किया। इस तरह भोज में भारतीय व्यंजनों और संगीत के माध्यम से दोनों देशों के बीच गहरी सांस्कृतिक कनेक्शन का शानदार प्रदर्शन किया गया।
उधर **पुतिन को दिए भारत की आत्मा से सजे छह अनमोल तोहफे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी भारत यात्रा के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाले छह विशेष उपहार भेंट किए हैं। ये तोहफे भारत-रूस की गहरी, स्थायी दोस्ती और साझा मूल्यों का प्रतीक हैं। ये उपहार न सिर्फ पीएम मोदी का पुतिन के प्रति व्यक्तिगत स्नेह दर्शाते हैं, बल्कि भारत की एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) और भौगोलिक संकेत (जीआई) जैसी पहलों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देते हैं।
बेहतरीन असम काली चाय
ब्रह्मपुत्र के उपजाऊ मैदानों में उगाई जाने वाली, अपनी तेज माल्ट जैसी महक और चमकदार रंग के लिए प्रसिद्ध, यह चाय असमिका किस्म से पारंपरिक तरीके से तैयार की जाती है। 2007 में जीआई टैग प्राप्त इस चाय में क्षेत्र की विरासत, जलवायु और शिल्प की झलक मिलती है। यह स्वास्थ्य लाभ के लिए भी मूल्यवान है।
चांदी का नक्काशीदार चाय सेट
खास नक्काशी से सजा यह चांदी का सेट मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) का चांदी का चाय सेट भारत और रूस दोनों में चाय के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
हस्तनिर्मित चांदी का घोड़ा
महाराष्ट्र का यह हस्तनिर्मित चांदी का घोड़ा भारत की धातु शिल्प परंपरा की बारीकी को प्रदर्शित करता है। यह गरिमा और वीरता का प्रतीक है, जिसका सम्मान भारतीय और रूसी दोनों संस्कृतियों में किया जाता है। इसकी आगे बढ़ती हुई मुद्रा भारत-रूस साझेदारी के निरंतर आगे बढ़ने का रूपक है। कश्मीरी केसर कश्मीर के ऊंचे इलाकों में उगाया जाने वाला, स्थानीय रूप से कोंग या जाफरान के नाम से मशहूर, यह केसर अपने समृद्ध रंग, सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है।
संगमरमर का शतरंज सेट
आगरा का यह हस्तनिर्मित सेट उत्तम शिल्प कौशल और कार्यात्मक लालित्य का मिश्रण है। यह क्षेत्र की पत्थर जड़ने की विरासत को दर्शाता है। इसमें व्यक्तिगत रूप से जड़े हुए रूपांकनों और विपरीत रंग के पत्थर के मोहरे हैं, जो कला का अद्भुत उदाहरण है। इसके साथ ही श्रीमद् भगवदगीता (रूसी भाषा में) महाभारत का यह अंश, जिसमें श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य, आत्मा और आध्यात्मिक मुक्ति पर मार्गदर्शन दिया है। इसका शाश्वत ज्ञान आंतरिक शांति के लिए प्रेरित करता है।