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नई दिल्ली,28 नवंबर।
भारत में कोयला खनन को रफ्तार देने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थाओं को भी अधिकृत एजेंसियों की सूची में शामिल कर लिया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, खान व खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की नेबेट द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से खनिज खोज संबंधी कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज तेज होगी, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और देश के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोयला मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले से 18 नई एजेंसियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए अधिकृत सूची में जोड़ा गया है। इससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोस्पेक्टिंग कार्यों के लिए एजेंसी चुनने में ज्यादा लचीलापन और विकल्प मिलेंगे। इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, कोलकाता;
मेरॉक्स माइनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम; यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता; माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;
नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन – टाटा स्टील लिमिटेड, पूर्वी सिंहभूम;
माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिदवान; रेम्को कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रपुर; साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड, गुरुग्राम;
जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, धर्मपुरी; नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट खासी हिल्स;
सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली; कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर; माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद; जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची;
रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद; सीएमएमसीओ टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड, हैदराबाद; जसनी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड। सरकार का मानना है कि अधिकृत प्रोस्पेक्टिंग एजेंसियों की संख्या बढ़ाने से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे अन्वेषण प्रक्रिया में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम कोयला और लिग्नाइट की खोज की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित एजेंसी सूची से शुरुआती चरण में ही खनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे देश में संसाधन विकास की गति तेज होगी। इसके साथ ही कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता में सुधार होगा, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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