प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भाकियू एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने दिया सुझाव

आर पी तोमर
नई दिल्ली, 26 नवंबर।
केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन की प्रभावी भागीदारी की और केंद्रीय बजट में कृषि की राशि को दोगुना करने की मांग की।
कृषि भवन के कक्ष संख्या 142 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक एवं पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने संगठन की ओर से किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र के सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा बजट से पूर्व हितधारकों से परामर्श में कृषि से सम्बंधित सुझाव दिये। वहीं बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने फसलों का उचित एवं निश्चित लाभकारी समर्थन मूल्य, पंचवर्षीय कृषि नीति, सस्ता एवं लंबी अवधि का कृषि ऋण, कृषि वैल्यू चैन को मजबूत बनाने हेतु प्रावधान करने, कृषि विस्तार प्रणाली में सुधार एवं बदलाव करने, प्रधानमंत्री फसल बीमा, सिंचाई और जल प्रबंधन, कृषि विपणन और इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग की स्थापना, निर्यातक फसलों के लिए बोर्ड का गठन करने, जलवायु परिवर्तन से कृषि के अस्तित्व के खतरे, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बजट में दोगुनी राशि का प्रावधान करने, देश में उद्यमिता अपनाने वाले युवा किसानों के लिए 5 करोड़ तक का स्टार्ट-अप फॉर एग्रीकल्चर का विशेष फंड बनाने तथा डिजिटल खेती के तहत ड्रोन आधारित सर्वे,रिमोट सेंसिंग,स्मार्ट सेंसर,डिजिटल मौसम स्टेशन, एआई आधारित फसल सलाह आदि को बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने पर बल दिया।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को उपरोक्त मुख्य बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराते हुए लिखित में एक पत्र भी सौंपा, जिसमें मुख्य बिंदुओं को लेकर विस्तार से अवगत कराया गया है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक बजट से पूर्व किसानों के साथ किए जा रहे परामर्श के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि देश में आज भी निजी क्षेत्र में सबसे अधिक रोजगार कृषि क्षेत्र से है लेकिन यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। कृषि क्षेत्र को बजट से अधिक प्रभावित नीतियां और फैसले करते है। कृषि को लेकर एक समग्र पंचवर्षीय किसान नीति की जरूरत है, जिसका उद्देश्य केवल उत्पादन आधारित न होकर कृषि एवं किसान कल्याण पर आधारित हो।कृषि हमेशा एक बड़े विचार का हिस्सा रही है। आजादी के बाद यह बड़ा विचार जमींदारी उन्मूलन प्रथा,1950 में सामुदायिक विकास की पहल,1960-70 के दशक में हरित क्रांति,1980 के दशक में दुग्ध क्रांति आई, लेकिन यह प्रक्रिया 1990 के दशक के बाद बंद हो गई। 2014 के बाद कृषि को लेकर सामने आई चिंता का जिक्र भी किया गया। फसलों का उचित एवं निश्चित लाभकारी समर्थन मूल्य- किसानों की आय सुरक्षा और खेती की लाभकारीता सुनिश्चित करने हेतु सरकार से मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2 लागत का डेढ़ गुना (सी2 + 50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और न्यायसंगत मूल्य मिल सके।