**रॉकेट बम बनाने वाला भी हुआ गिरफ्तार
आर पी तोमर
नई दिल्ली। दिल्ली धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे-वैसे नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अब एक और बात सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि दिल्ली ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आतंकी डॉक्टर उमर नबी ने जूतों के जरिए बम को एक्टिवेट किया था। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े फिदायीन हमलावर डॉक्टर उमर नबी ने ‘शू बम’ की तरह काम किया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को घटनास्थल से ऐसे फोरेंसिक और भौतिक साक्ष्य मिले हैं, जिससे साबित होता है कि उमर ने शू बम का इस्तेमाल किया है। दरअसल, जांच एजेंसी को धमाके वाली आई-20 कार के अदंर से जूते मिले हैं। दरअसल, जांच टीम को कार के दाहिने अगले टायर के पास ड्राइवर की सीट के नीचे से जूता मिला। जूते के अंदर एक धातु जैसा पदार्थ है। अब तक की जांच के आधार पर माना जा रहा है कि विस्फोट को सक्रिय करने के लिए इसी का इस्तेमाल किया गया था। टायर और जूते दोनों पर संवेदनशील विस्फोटक टीएटीपी के निशान मिल हैं, जिससे यह संभावना और बड़ गई है कि उमर ने विस्फोट करने के लिए अपने जूते में कोई मैकेनिज्म छिपा रखा था।जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी उमर मोहम्मद के जूते से टीएटीपी के ट्रेसेस मिले हैं। दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। सुरक्षा एजेंसियों के पुख्ता सूत्रों ने बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी उमर मोहम्मद एक ‘शू बॉम्बर’ हो सकता है। जांच में ऐसे कई सबूत हाथ लगे हैं जो इस दिशा में इशारा करते हैं। दरअसल ब्लास्ट स्पॉट से बरामद की गई उमर मोहम्मद की आई20 कार की ड्राइविंग सीट के नीचे, राइट फ्रंट टायर के पास एक जूता मिला है। जांच में इस जूते से एक मैटल जैसा विस्फोटक सब्सटेंस मिला है, जो धमाका करने में इस्तेमाल हुआ था। ऐसा अब तक की तफ्तीश इशारा कर रही है। जांच टीम को टायर और जूते दोनों से टी ए टी पी के ट्रेसेस मिले हैं। टी ए टी पी यानी ट्राइएकिटोन ट्राइपेरोक्साइड वही खतरनाक विस्फोटक है, जिसे दुनिया के कई बड़े आतंकी हमलों में इस्तेमाल किया गया है। इसे शैतान की मां के नाम से भी जाता जाता है। सूत्रों का दावा है कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी बड़े हमले के लिए भारी मात्रा में टी ए टी पी इकट्ठा कर रहे थे, जिसकी अब पुष्टि हो गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट्स के अनुसार, लाल किला धमाके में अमोनियम नाइट्रेट के साथ टी ए टी पी विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। दोनों केमिकल के मिश्रण से धमाके की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। जांच एजेंसियों को कार के रियर सीट के नीचे के हिस्से में भी विस्फोटक सामग्री के अवशेष मिले हैं। इससे साफ है कि कार में सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि कई पार्ट्स में विस्फोटक छिपाए गए थे। जांच में यह बात पुख्ता हो गई है कि ब्लास्ट की साजिश के लिए 20 लाख रुपये गिरफ्तार लेडी डॉक्टर शाहीन के जरिए आतंकी मॉड्यूल तक पहुंचाए गए थे। यानी फंडिंग चेन भी अब सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लग चुकी है।
जांच में सामने आया कि उमर मोहम्मद ने वही पैटर्न अपनाया जो दिसंबर 2001 में अमेरिका एयरलाइंस की फ्लाइट में देखा गया था। तब रिचर्ड रीड नाम के ‘शू बॉम्बर’ ने टीएटीपी भरे जूतों से ब्लास्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे समय रहते पकड़ा गया था। उमर मोहम्मद ने भी उसी तरह ‘शू बॉम्बर’ बनकर धमाका करने की कोशिश की थी।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सबूत हाथ लग चुके हैं, और आने वाले दिनों में इस मॉड्यूल के और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
उधर कार बम धमाके की जांच तेज करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक और अहम गिरफ्तारी की है। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से जसिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है, जिसे इस आतंकी साजिश में शामिल एक महत्वपूर्ण सहयोगी माना जा रहा है। यह गिरफ्तारी मामले में पहले से पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच से मिली सूचनाओं के आधार पर की गई है। एनआईए की टीम पिछले कई दिनों से घाटी में छापेमारी और पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान जसिर वानी की संलिप्तता के प्रमाण सामने आने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। गौरतलब है कि इससे पहले एजेंसी ने हमला करने वाले आत्मघाती हमलावर के सहयोगी आमिर रशीद अली को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जिस कार का इस्तेमाल विस्फोट में किया गया, वह उसके नाम पर पंजीकृत थी, जिसे लेकर एनआईए लगातार उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ये बता चला है कि दानिश ने कार बम विस्फोट से पहले रॉकेट बनाने की कोशिश की थी। आरोपी दानिश ने आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की। काजीगुंड का निवासी, आरोपी जसीर इस हमले का सक्रिय सह-षड्यंत्रकारी था। उसने आतंकवादी उमर उन नबी के साथ मिलकर इस आतंकी नरसंहार की योजना बनाई थी। एनआईए, बम विस्फोट के पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। आतंकवाद-रोधी एजेंसी की कई टीमें विभिन्न सुरागों का पता लगा रही हैं और आतंकी हमले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान के लिए राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।
