आर पी तोमर
नई दिल्ली। लालकिला बम विस्फोट कांड के मास्टरमाइंड डॉ उमर बम बनाने में भी माहिर था। उसने घटना के दिन लालकिले की पार्किंग में कार में बैठकर ही तीन घंटे में बम बना लिया था। उसी बम से बाद में ब्लास्ट किया। उधर सुरक्षा बलों ने जम्मु कश्मीर स्थित डॉ उमर के घर को ध्वस्त कर दिया तो कानपुर से एक मेडिकल छात्र को भी हिरासत में लिया गया है।
जांच एजेंसियों को मिले सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी डॉ. उमर ने सोमवार दोपहर लाल किले की पार्किंग में 3:20 पर प्रवेश किया था और शाम 6:22 मिनट पर बाहर निकला था। इन तीन घंटों तक वह पार्किंग के अंदर ही आई-20 कार में बैठा रहा। यह जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने उमर के साथियों से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्रवाई के बाद वह अमोनियम नाइट्रेट के अलावा फ्यूल ऑयल, टाइमर, डेटोनेटर सहित बम बनाने का अन्य सामान लेकर निकला था। जैश के एक हैंडलर से उसने कई माह पहले विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण लिया था। सूत्र बताते हैं कि उसे कुछ ही समय में बम बनाने में महारत हासिल थी। ऐसे में जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उसने तीन घंटे पार्किंग में बैठकर बम बनाया। इसके बाद वह लाल किले के पास लोगों की भीड़ जुटने के लिए शाम होने का इंतजार करता रहा। उसकी कारस्तानी सीसीटीवी कैमरे में कैद न हो पाए, इसके लिए उसने पार्किंग में पीछे की तरफ एकांत वाली जगह ढूंढी थी। पार्किंग में प्रवेश एवं निकासी द्वारों के अलावा अंदर भी 10 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन उसकी कार जहां खड़ी थी, वह हिस्सा कैमरे की जद में नहीं था। सोमवार को लाल किला बंद रहने के कारण पार्किंग में बहुत कम गाडि़यां थीं। वैसे यह बहुत बड़ा पार्किंग एरिया है। इसमें आम दिनों में बड़ी संख्या में टूरिस्ट बसें भी खड़ी होती हैं। उमर की साजिश दिल्ली में भीड़भाड़ वाले जगह पर विस्फोट करने की थी। इसके लिए फरीदाबाद से दिल्ली में घुसते ही उसने भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी की थी। रेकी करते हुए ही वह लाल किले तक आया था। फरीदाबाद से दिल्ली आने के दौरान उमर ने किन-किन मार्गों का इस्तेमाल किया और किन-किन लोगों से मुलाकात की। 10 नवंबर को उमर का दिल्ली में प्रवेश करते हुए पुलिस को एक और सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें उमर सीसीटीवी कैमरों को देखता नजर आ रहा है। फुटेज में कार में पीछे वाली सीट पर काले रंग का बैग रखा दिखाई दिया है। यह फुटेज बदरपुर सीमा पर टोल का है। उमर जिस तरह कैमरे की तरफ देख रहा था, उससे पता चलता है कि वह काफी डरा हुआ था। उसे पता था कि पुलिस उसे ढूंढ रही है। पहचान से बचने के लिए उसने मास्क लगा रखा था। कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल में दोपहर 2.30 बजे उमर को कार लेकर भागते हुए देखा गया। वहां से महज तीन किलोमीटर पर संसद भवन है। सिलसिलेवार धमाकों के लिए आतंकी पुरानी कारों को इकट्ठा कर रहे थे। फरीदाबाद से आठ कारों का जुगाड़ करना था। चार का हो गया था। बाकी चार के लिए डीलरों से आतंकी संपर्क कर रहे थे। कुछ का सौदा लगभग हो गया था लेकिन भुगतान नहीं किया जा सका, तभी दिल्ली में धमाका हो गया। पुलिस ने चारों कार बरामद कर ली हैं। लाल किले के सामने धमाके में आई-20 कार फरीदाबाद के सेक्टर-37 स्थित रॉयल कार जोन से 29 अक्टूबर को खरीदी गई थी। यह कार तारिक ने खरीदी थी और इसे डॉ. उमर को बेच दिया। दस्तावेज पूरे नहीं होने की वजह से कार उमर के नाम नहीं आ सकी थी। इसी मामले में डॉ. शाहीन को गिरफ्तार कर उसकी स्विफ्ट कार बरामद की गई थी, जिसमें एके-47 राइफल थी। इसी कार में राइफल के अलावा पिस्टल और गोलियां भी बरामद की थीं। शाहीन ने यह कार पुरानी ही खरीदी थी। तीसरी कार बुधवार रात फरीदाबाद के खंदावली गांव में मिली। यह कार डॉ. उमर नबी बट के नाम थी। इसी कार से विस्फोटक सप्लाई किया गया था। चौथी ब्रेजा कार गुरुवार को यूनिवर्सिटी में डाक्टरों की रिहायशी परिसर से बरामद की गई। यह कार डा. शाहीन की है, जिसे उसने सितंबर, 2025 में खरीदा था।
डॉ. शाहीन की स्विफ्ट कार का इस्तेमाल विस्फोट लाने के लिए किया जाता था। इस कार को डा. मुजम्मिल प्रयोग करता था। डा. मुजम्मिल और डा. शाहीन की गहरी दोस्ती थी। इसलिए वह मुजम्मिल को कार दे देती थी। सूत्र बताते हैं कि जो विस्फोटक बाहर से आता था, वह इसी कार में लाकर धौज में लिए गए किराये के कमरे तक पहुंचाया जाता था।
उमर का घर ब्लास्ट से उड़ाया
लाल किले के पास हुए कार धमाके के मास्टरमाइंड आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद के पुलवामा स्थित घर को सुरक्षा एजेंसियों ने एलईडी धमाके से ध्वस्त कर दिया। आतंकवाद के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड ने दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट केस की जांच के तहत कानपुर से जम्मू-कश्मीर के एक मेडिकल छात्र डॉ. मोहम्मद आरिफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। वह कानपुर कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहा था। डॉ. आरिफ जम्मू-कश्मीर का निवासी है और कानपुर के अशोक नगर इलाके में किराए के फ्लैट में रह रहा था। यूपी एटीएस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया। आरिफ का नाम उस समय सामने आया जब एटीएस ने पहले से गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद के फोन रिकॉर्ड खंगाले। जांच में पता चला कि दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क था। आरिफ गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग से जुड़ा हुआ है।
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