
डॉ. बसंत गोयल बोले — गौ माता की रक्षा ही सनातन धर्म की रक्षा है, भारत को घोषित किया जाए हिंदू राष्ट्र
नई दिल्ली। राजधानी के जंतर मंतर पर आज अखिल भारतीय गौ सेवक समाज द्वारा ऐतिहासिक गौ सेवक बलिदान दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर विश्व प्रसिद्ध समाजसेवी और गौ सेवक डॉ. बसंत गोयल ने कहा कि “गौ माता की सेवा और रक्षा ही सनातन धर्म की आत्मा है। जब तक गौ माता सुरक्षित नहीं, तब तक धर्म और संस्कृति सुरक्षित नहीं रह सकते।”
कार्यक्रम में 7 नवम्बर 1966 को संसद भवन के बाहर हुए गौ हत्या विरोधी आंदोलन में बलिदान देने वाले गौ भक्तों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
डॉ. बसंत गोयल के साथ इस कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र जी महाराज, दाती महाराज सहित कई संत-महात्मा, धार्मिक गुरु और सैकड़ों गौभक्तों ने भाग लिया।
“गौ रक्षा केवल आस्था नहीं, यह भारतीय संस्कृति की पहचान है” — डॉ. बसंत गोयल
डॉ. बसंत गोयल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा —> “गौ माता केवल एक पशु नहीं, वह हमारे वेद-पुराणों में वर्णित देवत्व का प्रतीक हैं।
उनके शरीर में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है।
गौ सेवा और गौ रक्षा से ही समाज में धर्म, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रसार होता है।”
उन्होंने कहा कि भारत में गौमांस पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और सरकार को गौ संरक्षण के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने चाहिए।
डॉ. गोयल ने जोर देकर कहा कि “जो राष्ट्र अपनी गौ माता की रक्षा नहीं करता, वह अपनी संस्कृति से विमुख हो जाता है।”
हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर गूंजा जंतर मंतर
सभा के दौरान “भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करो” के नारे गूंजते रहे।
गौ सेवक समाज के सदस्यों ने कहा कि सनातन धर्म के प्रतीक तत्व — गौ माता, गंगा, गीता और गायत्री — की रक्षा करना हर भारतीय का नैतिक कर्तव्य है।
सभा में उपस्थित संतों ने मांग की कि सरकार गौ रक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति बनाए और गौ हत्याओं पर सख्त दंड सुनिश्चित करे।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान गौ माता की महिमा का वर्णन करते हुए वेदों और पुराणों से प्रेरक प्रसंगों का पाठ किया गया।
संतों ने कहा कि वेदों में गौ को “अघ्न्या” कहा गया है — अर्थात जिसे कभी हिंसा का शिकार नहीं बनाना चाहिए।
सभा में उपस्थित लोगों ने दीप प्रज्वलित कर गौ भक्त बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
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कार्यक्रम के संयोजक डॉ. बसंत गोयल ने न केवल आयोजन का नेतृत्व किया, बल्कि श्रद्धांजलि मंच से सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया।
उन्होंने कहा —> “आज भारत को पुनः अपनी जड़ों से जुड़ने कीआवश्यकता है।
जब तक गौ माता का सम्मान नहीं होगा, तब तक रामराज्य की कल्पना अधूरी रहेगी।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अखिल भारतीय गौ सेवक समाज शीघ्र ही गौ रक्षा जागरूकता यात्रा देशभर में निकालेगा, जिसका उद्देश्य युवाओं में गौ सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाना होगा।
इस श्रद्धांजलि सभा में ज्ञानेंद्र जी महाराज, दाती महाराज, महंत जगदंबा दास, स्वामी विश्वेश्वरानंद, और अनेक संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गौ भक्तों ने भाग लिया।
अंत में सामूहिक रूप से गौ आरती की गई और “जय गौ माता, जय सनातन धर्म” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।