नागरिक देवो भव:भ्रष्टाचार-मुक्त भारत की ओर एक निर्णायक यात्रा- आम नागरिक के लिए सरकार का मतलब संसद या मंत्रालय नहीं,उसका स्थानीय सरकारी तहसील कार्यालय, नगर निगम,पुलिस स्टेशन, सरकारी अस्पताल ही सरकार का चेहरा होता है-समग्र विश्लेषण
भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, सामाजिक विश्वास का हनन-नागरिक सर्वोपरि और उसकी सेवा ही सर्वोच्च कर्तव्य है अपने की ज़रूरत...

