इस जिंदगी के सफ़र में थकान बहुत है,
चेहरे पर हँसी,मगर दिल में तूफ़ान बहुत है,
हर मोड़ पर मिलती है एक नई आज़माइश,
यहाँ जीने के लिए हौसला और अरमान बहुत है।
अपनों की महफ़िल में भी अनजान बहुत हैं,
रिश्तों की ज़मीं पर उठते तूफ़ान बहुत हैं,
गैरों से क्या करें शिकायत,ऐ दिल ज़रा बता,
यहाँ अपनों के ही अपनों पर इल्ज़ाम बहुत हैं।
शिकायतों का दौर देखूँ तो ठहर जाता हूँ,
रिश्तों की उलझनों में अक्सर बिखर जाता हूँ,
किस-किस के दर्द का हिसाब रखूँ जिंदगी में,
हर चेहरे के पीछे छिपे राज़ों से गुज़र जाता हूँ।
लगता है उम्र कम है,इम्तिहान बहुत हैं,
कुछ अधूरे ख़्वाब हैं,कुछ अरमान बहुत हैं,
अभी तो सीख़ना बाकी है जिंदगी की किताब से,
एक उम्र क़्या काफ़ी है?जब सवाल तमाम बहुत हैं।
थककर भी चलना है,यही जिंदगी का उसूल है,
हर ज़ख्म के भीतर छिपा सबक़ अनमोल है,
किशन शिकवों को छोड़कर,अब मुस्कुराना सीख लें,
इम्तिहान चाहे जितने हों,हौसला ही जीत का मूल है।

