ज़िंदगी के मैदान में,बस मौक़ों का इंतज़ार मत कीजिए,
हौसलों को यूँ ही ख़ामोश और लाचार मत कीजिए।
मेहनत को अपना बल्ला,विश्वास को हथियार बनाइए,
ख़ुद अवसरों की पिच सजाकर,जीत का आग़ाज़ कीजिए
क़िस्मत के दरवाज़े खुलें,इस आस में वक़्त मत गँवाइए,
अपनी मेहनत की चिंगारी से,सपनों के दीप जलाइए।
पसीने की हर बूँद को अपनी ताक़त बन जाने दीजिए,
संघर्षों की हर गेंद पर,सफ़लता के चौके लगाइए।
जो मुश्किलों से डरते हैं,वे इतिहास नहीं बनाते हैं,
जो तूफ़ानों से लड़ते हैं,वे ही परचम लहराते हैं।
इरादों में हो आग अगर,तो पत्थर भी राह बनाते हैं,
जो ख़ुद अवसर पैदा करते हैं,वे मंज़िल को पाते हैं।
हर ठोकर को सबक़ बनाकर,आगे बढ़ते जाइए,
हर मुश्किल को चुनौती देकर,अपना लोहा मनवाइए।
हार अगर राह में आए,तो उससे घबराइए मत,
गिरकर फिर उठने के दम पर,जीत का परचम लहराइए।
न बैठिए इंतज़ार में कि कोई सुनहरा पल आएगा,
मेहनत करने वालों के लिए हर दिन नया अवसर लाएगा।
किशन अपने कर्मों से ऐसी बुलंदी,अपने नाम कर जाइए,
ज़िंदगी के मैदान में ऐसा सफ़लता का चौका लगाइए!


