हृदय में धैर्य का दीपक,वह अँधेरों से नहीं घबराता है
वक्त की चाल समझता है,वह हर तूफ़ान से टकराता है।
नहीं माँगता पलभर में मंज़िल,न राहों से हार स्वीकारता है
अपनी अटूट इच्छाशक्ति से,तक़दीर के पन्ने बदल जाता है
सहने की शक्ति हो,वह कठिनाइयों से हारता नहीं,
लाख बिछें काँटे राहों में,वह आगे बढ़ना छोड़ता नहीं।
दर्द और संघर्ष की भट्ठी में,उसका हौसला बिखरता नहीं,
स्वयं पर विश्वास रखता है,वह गिरकर भी ठहरता नहीं।
संतोष जिसके मन में बसता,ख़ुशियों का संसार पाता है,
कम में भी मुस्कुराकर जीना,जीवन का सच्चा सुख सिखाता है।
लालच की आँधी से बचकर,वह मन का चैन बचाता है,
जिसे क़द्र है आज की दौलत की,वह कल को भी सँवार जाता है।
धैर्य,सहनशक्ति,संतोष मिलें,तो हर सपना आकार पाता है
मेहनत का बीज़ जो बोता है,सफ़लता का फ़ल खाता है।
जो समय के साथ चलता है,मंज़िल का सम्मान पाता है,
अडिग इरादों वाला इंसान,असंभव को संभव बनाता है।
न जल्दबाज़ी,न निराशा,न इच्छाओं का अंधा विस्तार हो,
धैर्य हृदय का आधार बने,सहनशक्ति जीवन का हथियार हो
किशन संतोष आत्मा की शांति बने,कर्मों में दृढ़ता अपार हो
फ़िर ख़्वाब हों चाहे जितने ऊँचे,हर मंज़िल पाने का अधिकार हो।


