छोटी-सी ठोकर से कभी,अपने हौसले टूटने मत देना,
विपरीत हवाओं में भी,विश्वास का दीप बुझने मत देना।
सहनशीलता को शक्ति बनाकर,हर मुश्किल से टकराना,
जो वक्त की अग्नि में तपे,वही सीखता है मुस्कुराना।
चंदन घिसता है तभी,अपनी सुगंध संसार में फैलाता है,
दर्द सहकर ही इंसान,अपने व्यक्तित्व को निख़ार पाता है।
जो संघर्षों में टूटे नहीं,वह इतिहास रच जाता है,
जो हर पीड़ा में सीख़ खोजे,जीवन में आगे बढ़ जाता है।
हर बात पर क्रोध करना,मन की कमजोरी दर्शाता है,
विपरीत परिस्थितियों में धैर्य,सच्ची ताकत कहलाता है।
जो अपमान के घूँट पीकर भी,अपने संस्कार बचाता है,
वही अपने श्रेष्ठ आचरण से,जग में सम्मान कमाता है।
जो घिसने से बचता है,वह अग्नि में जल जाता है,
जो त्याग और तपस्या करता है,वह पूजनीय बन जाता है
जीवन का मर्म यही है,हर दर्द को वरदान बनाइए,
खुद जलकर राख न बनिए,चंदन बनकर महक जाइए।
दुनियाँ की कटु बातों से,अपने सपने मत तोड़िए।
चंदन-सा जीवन जीकर,हर दिशा में खुशबू फैलाइए,
किशन सहनशीलता को अपना आभूषण बनाकर,
मानवता के मस्तक पर तिलक लगाइए।

