इतने नम्र बनें कि अहंकार भी झुक जाए,
हमारे मीठे बोलों से हर दिल मुस्कुराए,
हमारे व्यवहार में प्रेम की गंगा बहती रहे,
हमें देखकर दुनियाँ इंसानियत सीख़ जाए।
न विनम्रता में दिख़ावा हो,न शब्दों में अभिमान,
हमारे हर कर्म से झलके मानवता का सम्मान,
हमारी सादगी में ऐसी रोशनी का नूर हो,
कि हमसे मिलकर हर इंसान को हम पर गुरूर हो।
दुनियाँ से अलग बनना है तो व्यवहार बदलें ,
नफ़रत के अंधेरों में प्रेम के दीप जलाएं ,
ऊँचा वही नहीं जो ऊँचे पद पर विराजे,
बड़ा वही है जो झुककर टूटे दिलों को सँभाले।
हमारी नम्रता हमारी पहचान बन जाए,
हमारी विनम्रता दूसरों के लिए मिसाल बन जाए,
हमारे व्यक्तित्व में ऐसी शालीनता का रंग हो,
कि हमारे सामने दुनियाँ का अहंकार भी बेरंग हो।
आओ इतने विनम्र बनें कि दिलों में उतर जाएं ,
इतने सरल बनें कि हर चेहरे पर मुस्कान लाएं ,
किशन में और दुनियाँ में फ़र्क बस इतना नज़र आएं ,
दुनियाँ जहाँ सिर उठाए,हम प्रेम से सिर झुकाएं।
