चेहरे की तारीफ़ से इंसान महान नहीं होता,
सच्चे चरित्र के बिना व्यक्तित्व पहचान नहीं होता,
चेहरा तो वक्त के साथ ढलकर बदल जाता है,
चरित्र ही है जो जीवनभर साथ निभाता है।
चेहरा सँवारने में कुछ ही पल लग जाते हैं,
दर्पण के सामने नए रंग-रूप सज जाते हैं,
मगर चरित्र को गढ़ने में उम्र गुजर जाती है,
हर कठिन परीक्षा में उसकी असलियत निखर जाती है।
सुंदर चेहरा आँखों को कुछ पल भा सकता है,
मगर सुंदर चरित्र दिल में सदा समा सकता है,
रूप की चमक समय के साथ फीकी पड़ जाती है,
चरित्र की रोशनी मृत्यु के बाद भी याद आती है।
दुनियाँ चेहरे देखकर अक्सर तारीफ़ करती है,
मगर वक्त चरित्र देखकर ही असली कीमत धरती है,
रूप देखकर मिलने वाली वाहवाही क्षणिक होती है,
चरित्र से मिली प्रतिष्ठा जीवनभर की पूँजी होती है।
इसलिए तारीफ़ हो तो चेहरे की नहीं,चरित्र की हो,
पहचान हो तो दिखावे की नहीं,अच्छे कर्मों की हो,
किशन चेहरे क़ी सुंदरता से कुछ पल का आकर्षण बनता है
चरित्र सुंदर हो तो इंसान युगों तक याद रहता है।
