हर कृपा करके बख्श लेना,
मैं पापी बड़ा गुनहगार।
तेरे दर पर शीश झुकाया,
इक़ तू ही मेरा पालनहार।
मेरे भीतर दोष ही दोष हैं,
गुण का नहीं कोई आधार।
तेरी मेहर की नजर पड़ जाए,
मिट जाए मन का अंधकार।
जन्म-जन्म की भूलें मेरी,
कर्मों का बोझ अपार।
तेरे नाम की ओट मैं माँगूँ,
तू ही मेरा सच्चा दातार।
न धन माँगूँ, न मान माँगूँ,
न माँगूँ जग की जय-जयकार।
तेरे चरणों की धूल मिल जाए,
बस इतनी मेरी पुकार।
जब अंतिम घड़ी सामने आए,
तेरा नाम रहे मेरे साथ।
हर कृपा करके बख्श लेना,
रख लेना चरणों में माथ।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
